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सीवान : स्वतन्त्रता के अग्रणी सिपाही उमाशंकर, अंग्रेजों ने दिया था गोली मार देने का आदेश

श्याम सुंदर

जब दिल मे देशभक्ति का जज्बा हो तो उसे कोई नही रोक सकता. ऐसे ही एक देशभक्त थे उमाशंकर प्रसाद, सीवान के महराजगंज अनुमदेश को अंग्रेजी हुकूमत से मुक्त कराने के लिये कूद पड़े स्वतंत्रता आंदोलन की आग में. अंग्रेजी हुकूमत के मर्जी के खिलाफ युवाओं को शिक्षित करने के लिये 1931 में विद्यालय की स्थापना कर दी और उसमें देशभक्ति का पाठ पढ़ाने की शुरूआत कर दी.

उधर, जब अंग्रेजी हुकूमत को पता चला की उमाशंकर प्रसाद युवाओं को अंग्रेजों के खिलाफ भड़का रहे है तो स्कूल की लाइब्रेरी में आग लगा दी. फिर खोज शुरू हुई उमाशंकर की, इसकी सूचना जब उन्हें लगी तो वे भूमिगत हो गए. इसी बीच महात्मा गांधी का आगमन महाराजगज में हुआ तब उमाशंकर प्रसाद ने गांधी को 1001 रुपये की थैली भेट की. राजेन्द्र बाबू के नेतृत्व में नमक बनाओ आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की.

अग्रेजो के विरुद्ध सक्रिय भूमिका निभाने के कारण अंग्रेजी हुकूमत ने उमाशंकर प्रसाद को देखते ही गोली मार देने का आदेश जारी कर दिया. लेकिन जब रगों में देश भक्ति का खून दौड़ रहा हो उसे कौन रोक सकता है. भूमिगत होकर आंदोलन करियो की मदद करने लगे. इसे देखकर टॉमी सिपाहियों ने उमाशंकर प्रसाद की दुकान को लूट लिया. देश आजाद होने के बाद प्रसाद ने राष्ट्रहित में किसी भी प्रकार का मुआवजा लेने से इनकार कर दिया. उमाशंकर प्रसाद का निधन 15 अगस्त 1985 को हो गया.

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