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सीवान के बडरम गांव में मुस्लिम परिवारों में भी हो रही है छठ व्रत की तैयारी

कुमार विपेंद्र

सीवान जिले के हुसैगंज प्रखंड के बड़रम गांव में छठ की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. यहां छठ की तैयारी हिंदुओं के अलावे मुस्लिम परिवारों में भी हो रही है. कुछ मुस्लिम युवक दूसरे प्रदेशों से छुट्टी लेकर घर में हो रहे छठ में भाग लेने के लिए गांव आये हुए हैं.

बताया जाता है कि सैकडों वर्ष से बड़रम गांव में कई मुस्लिम परिवारों में भी छठ धूम-धाम से मनाया जाता रहा है. बड़रम गांव निवासी अब्दुल जलील की पत्नी नईमा खातून विगत 25 वर्षों से छठ का व्रत रखती हैं. नईमा खातून की सास ने मन्नत मांगी थी कि जब उनको पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी तो वे छठ का व्रत रखेंगी. छठ मईया ने उनकी मन्नत पूरी कीं और अब्दुल जलील उर्फ़ भिखारी का जन्म हुआ. तब से छठ व्रत की परंपरा उनके परिवार में हैं. अपनी सास के बाद नईमा इस परम्परा को जारी रखी हुई हैं. लाडली खातून और जैमुन खातून की तरह मोहल्ले के कई अन्य मुस्लिम परिवार भी छठ मैया में आस्था रखते हैं. जो लोग छठ का व्रत नहीं रखते हैं,वे छठ पूजा में प्रयोग होने वाली सामग्री व्रतियों को देते हैं. बड़रम गांव के ही मुस्लिम युवक बादशाह अली की पत्नी विगत चार वर्षों से छठ का व्रत करती है. बादशाह अली छठ का दाऊरा घाट पहुचाने के लिए कर्नाटक से छुट्टी लेकर घर आये हैं. बकौल बादशाह उनके खानदान में छठ व्रत की परंपरा सदियों से आ रही है. उनकी दादी-परदादी भी छठ करती रही हैं.

टेंट व्यवसायी निजामुद्दीन की पत्नी शायरा खातून अपनी पीढ़ियों की परंपरा निभाते हुए करीब 40 वर्षो से छठ का व्रत रखती रहीं हैं.मगर इस साल तबियत ठीक नहीं रहने की वजह से व्रत नहीं रख पा रही हैं. फिर भी शायरा खातून छठ का सामान व्रतियों को भिजवायेगी. शायरा के मुताबिक ये सिलसिला जीवन भर चलता रहेगा. बड़रम गांव निवासी शिक्षक राकेश रंजन सिन्हा बताते हैं कि यदि आपको हिन्दू मुस्लिम एकता देखनी हो तो बड़रम गांव में आइये. यहां के छठ घाटों की सफाई हो या कुछ और हिन्दू-मुस्लिस सब मिलकर करते हैं. ग्रामीण युवा छोटे अली, बाबू अली इरफ़ान जैसे युवकों का कहना है कि हम लोग छठ त्यौहार का इंतजार बेसब्री से करते हैं. छठ का प्रसाद खरना के दिन से ही घूम-घूम कर खाते है.

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