सीवान : बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर तितिर स्तूप पर परिचर्चा और चित्र प्रदर्शनी मेला आयोजित
सीवान || जिले के जीरादेई प्रखंड क्षेत्र के तितर स्तूप स्थित बौद्ध मंदिर परिसर में शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर भगवान बुद्ध की पूजा-अर्चना की गई. वहीं पितरौ ध्यान लोकस मंदिर, विजयीपुर, प्रवर्तक बिहार एवं पंचशील नगर में जगत के माता-पिता के प्रतीक ध्वजारोहण किया गया एवं लिखित प्रार्थना किया गया तथा माता-पिता के पूजन का संकल्प दोहराया गया. जगत के माता-पिता के पूजन का अभिप्राय यह है कि माता-पिता हीं भगवान है जो जीवन के दशा एवं दिशा बदलते हैं, इस परंपरा को आगे बढ़ाने से वृद्धा आश्रम की कोई आवश्यकता नहीं पड़ेगी. वहीं बौद्ध दर्शन के मूल स्वरूप पर एक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया. आयोजित मेला में आये प्रबुद्धजन, छात्र एवं छात्राओं ने स्तूप पर लगाये गए चित्र प्रदर्शनी से काफी खुश दिखे, क्योंकि प्रदर्शनी में बुद्ध के जीवन काल की अद्भुत चित्र थी. साथ हीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के द्वारा उत्खनन से प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्यों को भी दिखाया गया. जिसे विभिन्न स्कूल एवं कॉलेज के छात्रों ने ज्ञान का उत्तम माध्यम बताया. चित्र प्रदर्शनी को युवा चित्रकार रजनीश कुमार मौर्य एवं अविनाश कुमार गुप्ता ने संयोजन किया था. सीवान तितर स्तूप विकास मिशन की ओर से उपस्थित गणमान्यजनों को तितर स्तूप का प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया. कार्यक्रम का संचालन डॉ कृष्ण कुमार सिंह ने किया.

वहीं डॉ कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि तितर स्तूप का विकास सीवान जिले की तकदीर बदल देगा. बुद्ध वंदना बौद्धाचार्य टुनटुन बौद्ध एवं विमलेश बौद्ध ने किया. समाजसेवी ई पीके मल्ल ने कहा कि बुद्ध मानवीय मूल्यों की पहचान है, जिन्होंने मानव के दुःख हरने का उत्तम तरीका बताया तथा जिनके जीवन दर्शन को पूरी दुनिया आदर्श मानती है. उन्होंने बताया कि दलाई लामा ने भगवान बुद्ध को विष्णु का अवतार कहा है. बौद्धचार्य विमलेश बौद्ध ने कहा कि तीतिर स्तूप के विकास से पूरे जिले का विकास जुड़ा हुआ है, जो आने वाले समय में रोजगार का अच्छा जरिया होगा. डॉ ललितेश्वर कुमार ने कहा कि बौद्ध दर्शन वैज्ञानिक पद्धति है तथा समता मूलक समाज के निर्माण में विश्वास करता है. उन्होंने बताया कि तितिर स्तूप के पुराने स्वरूप को कायम करने के लिए प्रयास जारी है आने वाले समय में यह स्थल पर्यटन के क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बनेगा. समाजसेवी विद्याभूषण कुशवाहा ने कहा कि साहित्यिक और पुरातात्विक साक्ष्यों के बावजूद अगर संदेह हो तो और भी शोध और उत्खनन भले ही करा लिया जाए, लेकिन सीवान के गौरवशाली इतिहास के साथ कोई अन्याय न किया जाय. तितिर स्तूप क्षेत्र का विकास सीवान का तस्वीर बदल देगा. अशोक सम्राट ने कहा कि तितिर स्तूप के पास यदि एक अध्ययन केंद्र स्थापित किया जाए तो इससे भारी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु आने लगेंगे. आरती सिंह ने बताया कि पालि साहित्य में 84,000 देशनाएं संग्रहित हैं, जिनमें 82,000 सम्यक सम्बुद्ध की हैं और 2,000 भंते सारिपुत्र एवं भंते महामौद्गलायन की हैं. उन्होंने बताया कि भंते सारिपुत्र भगवान बुद्ध के शिष्यों में प्रमुख थे और उन्हें भगवान ने धम्मसेनापति कहा था. जब वे बोलते थे तो लगता था सिंहनाद हो रहा है. महायान में तो भगवान बुद्ध की आभिप्रायिक देशनाओं का व्याख्यान भंते सारिपुत्र से हीं कराया गया है. ऐसे महान सपूत को भला कितने दिनों तक भारत भुला सकता था. युवा चित्रकार रजनीश कुमार मौर्य ने बताया कि मगध ने अपने माटी के उस लाल को आजादी के सात दशक बाद याद किया है, देर आए दुरुस्त आए की पहल पर, बिहार सरकार ने भन्ते सारिपुत्र के महत्त्व को स्वीकार करते हुए वर्ष 2012 में, उनके महापरिनिर्वाण दिवस अर्थात कार्तिक पूर्णिमा को सारिपुत्र दिवस घोषित किया था.

इस मौके पर अध्यक्ष माधव लाल शर्मा, चीफ ऑफिसर शिवम कुमार, बलिंद्र सिंह, ई सतीश कुमार, प्रशांत कुमार, दिलीप कुमार उर्फ चूमन श्रीवास्तव, उपेंद्र श्रीवास्तव, नीरज श्रीवास्तव, अमित श्रीवास्तव, आशुतोष यादव, मनीष दुबे, ई अंकित मिश्रा, राजन तिवारी, विशोक श्रीवास्तव, राजद नेता हरेंद्र कुमार सिंह, चित्रकार अभिनाश कुमार, रितेश श्रीवास्तव, शालू श्रीवास्तव, रमाकांत प्रसाद, अजय श्रीवास्तव, सीता राम हरिजन, अजीत सोनी, राजकुमार पांडेय, आयुष दुबे, रमेश श्रीवास्तव, हरिशंकर चौहान, प्रमोद श्रीवास्तव उर्फ छोटू जी, युगल खरवार, छोटू सिंह, गुलशन खरवार, शैल देवी, प्रियंका सिंह व प्रिया सिंह सहित काफी संख्या में क्षेत्रीय लोगों ने भाग लिया. (ब्यूरो रिपोर्ट).