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पटना : नेशनल सिल्क एक्सपो में मॉडल्स ने किया सिल्क साड़ियों का प्रदर्शन

पटना के तारामंडल सभागार में चल रही नेशनल सिल्क एक्सपो में मंगलवार को सिल्क थीम पर आधारित फैशन फोटोशूट किया गया. इस कार्यक्रम में जब मॉडल्स विभिन्न राज्यों की सिल्क साड़ियां पहनकर दर्शकों के सामने आयी तो उनकी खूबसुरती के साथ सिल्क की चमक भी चारों ओर फैल गई. इस कार्यक्रम के दौरान मॉडल्स ने भारत के विभिन्न राज्यों के बुनकरों द्वारा तैयार किए गए साड़ियों का बेहतरीन ढंग से प्रदर्शन किया.

ग्रामीण हस्तकला विकास समिति के प्रबंध निदेशक जयस गुप्ता ने बताया कि 1 जनवरी से 10 जनवरी तक आयोजित इस एक्सपो में सर्दियों और शादियों के सीजन के लिए खास कॉटन व सिल्क हैंडलूम साड़ियों की लेटेस्ट वैरायटी और नए डिजाइंस उपलब्ध हैं. यहां ग्राहकों को देश के अलग-अलग राज्यों से आए बुनकरों द्वारा तैयार सिल्क साड़ियों का लुभावना कलेक्शन मिल रहा है जो शहर के बाजारों में देखने को नहीं मिलेगा. जयस गुप्ता ने बताया कि इस एक्सपो में गुजरात कि डबल इक्कत हैंडमेड पटोला साडी उपलब्ध है जो आठ महीने में तैयार होती है और इसे दो बार बना जाता है. हर धागे को अलग से कलर किया जाता है, प्योर सिल्क की होने की वजह से यह इतनी महंगी होती है. वहीं महाराष्ट्र की पैठनी साड़ियों में गांव का परिवेश है तो वहीं राजा-महाराजाओं का राजसी अंदाज तो कहीं मुगलकाल की कला है. बनारस के बुनकर अपनी साड़ियों को नए ज़माने के हिसाब से लोकप्रिय बनाने के लिए कई तरह के प्रयोग करते रहते हैं. कभी वे बनारसी साड़ियों पर बाग की छपाई करवाते हैं तो कभी वे बनारसी सिल्क साड़ियों पर महाराष्ट्र की पैठनी साड़ियों के मोटिफ बुनते हैं.

उन्होंने कहा कि इस एक्सपो में रेशम की बुनाई के लिए मशहूर बिहार के भागलपुर के बुनकरों द्वारा कुर्ता-पायजामा के लिए हाथ से बुने हुए भागलपुर सिल्क व मोदी जैकेट का कपड़ा भी उपलब्ध है. इस एक्सपो में बुनकर द्वारा तमिलनाडु की प्योर जरी वर्क की कांजीवरम साड़ी, मैसूर सिल्क साड़ी, क्रेप और जॉर्जेट सिल्क, बिहार का टसर सिल्क, आंध्रा प्रदेश का उपाड़ा, उड़ीसा का मूंगा सिल्क सहित अन्य प्रदेश के सिल्क साड़ियां प्रदर्शित की जा रही है. (अनूप नारायण सिंह की रिपोर्ट).

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