सीवान : श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग पर मिथिला सा दिखा उल्लास, राजन जी महाराज के भोजपुरी में विवाह गीत की मनोहारी प्रस्तुति से श्रद्धा के उल्लास में बही उमंग की बयार
सीवान || शहर के वीएमएचई इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित राजन जी महाराज के संगीतमय, लालित्यपूर्ण, रसमयी श्रीराम कथा के वाचन के छठे दिन शुक्रवार को प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाह का प्रसंग, ऐसा लगा जैसे सीवान मिथिला नगरी बन गया. विवाह गीतों की सुमधुर प्रस्तुतियों ने सभी श्रद्धालुओं को थिरकने पर मजबूर कर दिया. वहीं राजन जी ने जब “कहवा के पीयर माटी कहां के कुदाल हो” गीत गाया तो पूरा कथा पांडाल उमंग और उल्लास से सराबोर हो गया. मिथिला नगरिया निहाल सखिया गाना पर सीवानवासी भी श्रद्धा से निहाल होते दिखे. श्रीराम सीता विवाह प्रसंग में छप्पन भोग के स्वादिष्ट भोग को श्रीभगवान को समर्पित किया गया.

बता दें कि शुक्रवार को श्रीराम कथा की शुरुआत श्रीराम चरित मानस की आरती से हुई, जिसमें दैनिक यजमान शामिल हुए. मंच संचालन राजेश पांडेय और अंजनी पांडेय ने किया. राजन जी महाराज ने श्रीराम कथा में मिथिला में धनुष यज्ञ के आगे की कथा सुनाना प्रारंभ किया. मिथिला में शिव धनुष टूटने पर क्रोधित श्री परशुराम मिथिला नगरी पहुंचे. क्रोधित श्रीपरशुराम को भगवान श्रीराम ने अपनी विनम्रता से शांत किया. राजन जी ने कहा कि देवत्व की भावना से ही इंसान का जीवन सार्थक होता है. जब कोई इंसान दूसरे की प्रगति और उन्नति देखकर खुश होता है तो वह देवत्व की भावना से सुसज्जित होता है. किसी की उन्नति से प्रसन्न होकर इंसान देव स्वरूप बन जाता है. इस संदर्भ में हर व्यक्ति को आत्मपरीक्षण और आत्ममूल्यांकन अवश्य करना चाहिए कि वह देवत्व के कितने करीब या दूर है. दूसरों के उत्कर्ष को बर्दाश्त करना उसे सराहना ही देवत्व है जो बिना भगवान की कृपा से संभव नहीं है. भगवान की कृपा पाने के लिए सतत् निरंतर नाम कीर्तन और अटूट विश्वास आवश्यक है. बाल्मीकि जैसा व्यक्तित्व भी नाम कीर्तन के माध्यम से महान बन गया. रघुनंदन का नाम जपकर नालायक पुरुष भी पूजने लायक बन जाता है. श्रद्धापूर्ण भागवत नाम जप से जीवन में आमूल चूल परिवर्तन आ जाता है. जीवन मंगलमय होने लगता है। जब राजन जी ने ” हो जाला नालायक पूजे लायक रघुनंदन भज के” भजन गाया तो संपूर्ण कथा पांडाल में उमंग, उल्लास, हर्ष की त्रिवेणी बह उठी और हर उम्र वर्ग के श्रद्धालु जम कर थिरके. मातृशक्ति ने भी थिरक कर अपनी श्रद्धा अभिव्यक्त की.

श्रीराम कथा के दौरान राजन जी ने कहा कि भगवान प्रेम से मिलते हैं लेकिन जब नियम में भगवान को बांधेंगे तो वे आपसे दूर हट जायेंगे. उन्होंने सचेत किया कि जब भी जीवन में कुछ खुशी के पल आए तो जिसके कारण खुशी मिली हो, उसे कभी भूलना नहीं चाहिए अपितु उसका शुक्रगुजार होना चाहिए. साथ ही, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संतोष सबसे बड़ा धन है. अपना कर्म करते रहिए और सतत प्रयत्नशील रहकर जो प्राप्त है उसे पर्याप्त मानने का स्वभाव जिंदगी को सुखद बना देता है. शुक्रवार को कथा के दौरान कई शिक्षाविद् , प्रशासनिक अधिकारी, अधिवक्ता सहित अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे. जिनका स्वागत श्रीराम कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ राजन कल्याण सिंह, स्वागताध्यक्ष डॉ शरद चौधरी, संयोजक डॉ रूपेश कुमार, संरक्षक डॉ रामेश्वर कुमार, डॉ राम इकबाल गुप्ता, कोषाध्यक्ष प्रेमशंकर सिंह ने सम्मानित किया. दैनिक यजमान के तौर पर दयानंद आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य सुधांशु शेखर त्रिपाठी, नेहा त्रिपाठी, सीवान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष चार्टड अकाउंटेंट कुमार गंधर्व उर्फ बंटी और अर्चना, डॉक्टर आशुतोष दिनेंद्र, डॉक्टर रूपम, बसंत पाठक , पूनम देवी, विजय जादूगर, पुष्पा चौरसिया, डॉक्टर आर शंकर, डॉक्टर अर्चना शंकर, रजनीकांत जायसवाल, शिल्पी देवी आदि रहे. इस अवसर पर डॉ अभिषेक सिंह, कोशी वैद्यन, थॉमस कोशी, जिला अवर निबंधन पदाधिकारी पंकज कुमार झा, डॉ ओमप्रकाश, प्रोफेसर संदीप दुबे, प्रोफेसर पूजा तिवारी आदि मौजूद रहें. (ब्यूरो रिपोर्ट).