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ऐतिहिसिक धरोहर गौशाला की स्थिति बदहाल

अभिषेक श्रीवास्तव

सीवान में लावारिश मवेशियों को हिफाजत से रखने की नियत से बना गौशाला आज खुद बेहिफाजत हो गया है.सरकार और प्रशासन की बेख्याली और उदासीनता के कारण सीवान के ऐतिहासिक धरोहरों की श्रेणी में आने वाले गौशाला की स्थिति बदहाल है.यहाँ न तो मवेशियों के चारे के मुकम्मल व्यवस्था है और ना ही चारागाह की.नतीजतन,जैसे-तैसे गौशाला कार्य समिति के सदस्य इधर-उधर से चंदा मांग गौशाला को चला रहे है.

शहर के अस्पताल रोड स्थित सन 1917 से एक बीघा भूमि में स्थापित सीवान का ये गौशाला काफी गौरवशाली रहा है,लेकिन पिछले कुछ वर्षो से इसकी स्थिति बद से बदत्तर हो गयी है.गौशाला की दिवारे और छत बिल्कुल ही जर्जर हो गयी है.इसके भवन टूट कर गिर रहे है लेकिन इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है.यहाँ काम करने वाले गौ सेवक रामानंद अपनी सेवा भावना के चलते दिन रात एक कर यहाँ मौजूद गायों की देखभाल करते हैं और इसकी बदहाली पर आंसू बहाने के विवश है.

गौरतलब है कि सीवान के इस गौशाला को स्थापित हुए 100 साल हो गए हैं पर,देश की आजादी के बाद किसी सरकार ने इसकी और ध्यान नहीं दिया.गौशाला कार्य समिति के  सदस्य राजेश कुमार की माने तो लोगों की मदद से ही गौशाला की देख-रेख होती  है.लोगो से चंदा मांगकर गायों के लिए चारा खरीदते है.वही इस बाबत पूछे जाने पर सदर एसडीओ श्याम बिहारी मीणा भी गौशाला की बदहाली की बात स्वीकारते हैं.अनुमंडल पदाधिकारी का कहना है कि राज्य सरकार ने इसके जीर्णोधार के लिए 20 लाख रूपये दिया जिससे शीघ्र हीं  गौशाला का भी जीर्णोधार कराया जायेगा.

 

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