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सीवान : निःस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है प्रभु श्रीराम और भईया भरत का मिलाप – डॉ लवी मैत्रेयी शर्मा

सीवान || हसनपुरा नगर पंचायत के उसरी शिव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के अंतिम दिन गुरुवार संध्या श्रद्धालु भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. व्यास मंच पर विराजित श्रीधाम वृंदावन से पधारी संगीतमय श्रीमद् वाल्मीकि रामायण कथा वाचिका डॉ लवी मैत्रेयी शर्मा द्वारा अपने सुमधुर वाणी से भक्तों को रावण वध के उपरांत अयोध्या लौटने के क्रम राम और भरत के मिलाप तथा प्रभु श्रीराम के राजतिलक की कथा सुनाई गई.

इस दौरान डॉ लवी ने कहा कि भरत मिलाप और भगवान राम के राजतिलक रामायण के सबसे भावुक प्रसंगों में से हैं, जो निस्वार्थ प्रेम, त्याग और कर्तव्य को दर्शाते हैं. चित्रकूट में भरत ने राम को वापस लाने का प्रयास किया. लेकिन राम के न मानने पर उनकी चरण पादुकाएं लेकर नंदीग्राम में तपस्वी रूप में शासन किया. 14 वर्ष के वनवास और लंका विजय के बाद, गुरु वशिष्ठ की उपस्थिति में भव्य तरीके से राम का राज्याभिषेक हुआ. डॉ शर्मा ने विस्तार से कथा का वर्णन करते हुए बताया कि वनवास के दौरान, भरत ने राम को मनाने के लिए चित्रकूट जाकर निषाद राज के साथ मुलाकात की और राम के चरणों में गिरकर क्षमा मांगी. भरत ने राम को राजा दशरथ के निधन का दुखद समाचार सुनाया. जिससे राम, सीता और लक्ष्मण भावुक हो गए. राम ने अयोध्या लौटने से इनकार कर दिया. जिसके बाद भरत ने राम की चरण पादुकाएं (खड़ाऊं) लीं. उन्होंने इसे अयोध्या के सिंहासन पर रखकर राम का प्रतिनिधि बनकर नंदीग्राम में शासन किया. यह प्रसंग भ्रातृत्व प्रेम का बेमिसाल उदाहरण है. 14 वर्ष के वनवास के बाद लंका पर विजय प्राप्त कर, राम-सीता-लक्ष्मण वापस अयोध्या लौटे. प्रभु श्रीराम के जगत जननी माता सीता और भईया लक्ष्मण के साथ लंका विजय के उपरांत अयोध्या आने पर अवध के वासियों ने अपने घरों के आगे रंगोली बनाई और दीया से अयोध्या नगरी को गुलजार कर अपने दुलारे राम का स्वागत किया. तभी से ये परंपरा बन गई और पूरे संसार के सनातनी इस शुभ दिवस को दीपावली के रूप में मनाते हैं. गुरु वशिष्ठ और अन्य ऋषियों की देखरेख में, उत्सव के माहौल में राम का राज्याभिषेक किया गया. भरत ने स्वयं इस अनुष्ठान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. भईया भरत ने राम का राज्याभिषेक करके ही उन्हें वास्तव में सिंहासन सौंपा, जो उनके निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक था. प्रभु श्रीराम का राजतिलक होते ही पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया. इस दौरान राम दरबार की झांकी ने सबका मन मोह लिया. मानस आरती और प्रसाद वितरण के उपरांत अंतिम दिन के कथा को विराम दिया गया.

मौके पर समिति के संयोजक पुरूषोतम दास जी महाराज, हलचल दास जी महाराज, आचार्य पंडित विजय मिश्रा, यज्ञाचार्य पंडित राजू मिश्रा, मुख्य यजमान कृष्णा जी प्रसाद व श्रीमती नीतू देवी, विकास तिवारी व श्रीमती नेहा देवी, हिन्दू युवा वाहिनी के कृष्णा शेखर जयसवाल, रामनवमी सेवा समिति के धनंजय जयसवाल, सरविंद गुप्ता, आचार्य वरुण मिश्रा, छठूलाल प्रसाद, अरविंद गुप्ता, शत्रुध्न प्रसाद, मुकेश अग्रवाल, जगरनाथ पंडित, मनोज गुप्ता, नंदकिशोर पांडेय, आलोक कुमार, विश्राम राम, बैद्यनाथ चौधरी, संजय कुमार गुप्ता, परमात्मा जी प्रसाद, सुबास चौधरी, बृजमोहन जी अग्रहरी, रितेश अग्रवाल, जयशंकर गुप्ता, विकास कुमार, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि प्रकाश गुप्ता, रविंद्र कुशवाहा समेत सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु श्रोता मौजूद थे. (सीवान के हसनपुरा से अभय शंकर की रिपोर्ट).

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