सीवान : श्रीराम कथा के प्रथम दिन अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पूज्य राजन जी महाराज ने सत्संग और रामचरित मानस ग्रंथ की महिमा पर डाला प्रकाश
सीवान || सत्संग की महिमा निराली है, जो नियमित तौर पर सत्संग सुनते हैं, उनका जीवन सज संवर जाता है. जिस प्रकार मोटर वाहनों को सर्विसिंग सेंटर की आवश्यकता होती है उसी प्रकार बेहतर मानसिक स्वास्थ्य हेतु भी सत्संग एक सर्विस सेंटर का काम करता है. हमारी जितनी पात्रता होती है हमारे पात्र में उतनी ही सामग्री आती है. सत्संग वास्तव में पात्रता का निर्माण करता है. ये बातें रविवार को सीवान नगर के वीएमएचई इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित श्रीराम कथा के शुभारंभ के अवसर पर प्रथम दिन अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पूज्य राजन जी महाराज ने कही.

उन्होंने कथावाचन के दौरान भगवान श्रीराम की जन्मस्थली परम पावन अयोध्या नगरी की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि जो भी श्रद्धालु रामनवमी के दौरान वहां चला जाता है उसको सारे तीर्थों का फल मिल जाता है. उन्होंने कहा कि समय रहते ही अपने आस्था और श्रद्धा को अभिव्यक्त कर लेना चाहिए. समय रहते तीर्थ आदि का भी भ्रमण कर लेना चाहिए। कब कौन किस तरह की अस्वस्थता का शिकार हो जाए यह तो भगवान श्रीराम ही जानते हैं. पूज्य राजन जी महाराज ने कहा कि श्रीराम चरित मानस महज एक पुस्तक नहीं है अपितु ग्रंथ है. मन में बंधी ग्रंथि को खोलकर रखने वाला ही ग्रन्थ होता है. श्रीराम चरित मानस का एक एक प्रसंग हमारा सकारात्मक मार्गदर्शन करता है और हमारे मानस को सदविचारों से आलोकित करता है. इसलिए जब भी अवसर मिले श्रीराम चरित मानस अवश्य पढ़ें. इसके सरल तथ्य जब मानस में प्रवेश करते हैं तो जीवन आध्यात्मिक आनंद से सुगंधित हो उठता है. श्रीराम कथा के प्रथम दिन नारी शक्ति का वंदन किया गया. कथा के मुख्य यजमान सुभाष प्रसाद और धर्मशिला देवी, सह यजमान और दैनिक यजमान ने कथा का श्रवण किया.
प्रथम दिवस श्रीराम कथा की झलकियां :
पौराणिक पंगनूर गाय को देख लोग निहाल होते रहे.
मंच के निकट भरौली मठ के महंत स्वामी रामनारायण दास और वेद विद्यालय के बटुक भी बैठे थे.
पांच महिलाओं को पंच पल्लव के पौधे वितरित कर उनकी सेवा का कराया गया संकल्प.
कई श्रद्धालु अपने लड्डू गोपाल को लेके बैठे थे.
सदर एसडीएम आशुतोष गुप्ता अपने बेटे और अपने माता पिता के साथ बैठ कथा श्रवण किया.
इस बार के श्रीराम कथा श्रवण के दौरान सृष्टि के प्रति स्नेह के जागरण और पर्यावरण संरक्षण के संदेश का प्रसार भी है. पूज्य राजन जी ने कहा कि इस बार पंच पल्लव के 108 पौधों का रोपण कथा श्रवण के दौरान किया जाएगा. (ब्यूरो रिपोर्ट).