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कैमूर : दो भाईयों की जोड़ी बनी मिसाल, पांच सालों से चैत्र नवरात्रि के अष्टमी को निशा पूजा पर मां मुंडेश्वरी मंदिर का कराते हैं सजावट

कैमूर / भभुआ || जिले में दो भाईयों की जोड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है. दोनों भाई नवरात्रि में मां मुंडेश्वरी मंदिर की सजावट में लगभग करोड़ रुपए खर्च करते हैं. वे देश-विदेश से महंगे फूल मंगाते हैं जिससे मां मुंडेश्वरी मंदिर की भव्य सजावट होती है.

बता दें कि मां मुंडेश्वरी मंदिर के नीचे कुछ दूर पर भगवानपुर प्रखंड के उमापुर में रहते हैं दो भाई. बड़ा भाई नागेंद्र दुबे वहीं दूसरा सोनू दुबे, जो जिला प्रशासन और मंदिर के संस्था से अलग अकेले अपने दम पर शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि के अष्टमी के दिन मंदिर की सजावट कराते हैं. वहीं नागेंद्र दुबे ने बताया कि मेरे छोटे भाई का मन हमेशा से ही आस्था से जुड़ा हुआ है. आज से सात साल पहले जब हम लोग मां मुंडेश्वरी मंदिर में अष्टमी के दिन निशा पूजा पर मां का दर्शन करने गए थे, जहां भक्तों का भीड़ अंधेरे में मां मुंडेश्वरी का दर्शन करने पहुंचे थे. वहीं इस व्यवस्था को देख दोनों भाइयों का मन विचलित हो गया. जिसके बाद दोनों भाइयों में एक आस्था का सागर जागा. जिसके बाद पांच सालों से देश विदेश से फुल माला मंगाकर मां मुंडेश्वरी के मंदिर को सजवाते आ रहे हैं, जो देखने में काफी मन मोहक लगता है. नवरात्रि के अष्टमी के दिन निशा पूजा पर मंदिर के परवा पहाड़ी को नीचे से ऊपर तक लाइट से सजाया जाता है, ताकि मां की महिमा पूरे देश में विख्यात रहे. वहीं सोनू दुबे ने बताया कि मन में मां के प्रति काफी भक्ति है, जिसको लेकर हमलोग पांच सालों से मंदिर को सजवाते हैं, जिसमें थाईलैंड सहित भारत देश के कई नामी शहरों से फूल माला मंगाया जाता है और मां की मंदिर को सजाया जाता है.

अष्टमी के दिन सजावट लाइट से लेकर सभी तरह की सुविधाएं हम दोनों भाइयों के तरफ से हीं किया जाता है. यह एक आस्था है, मां हर साल अपना श्रृंगार खुद तय करती हैं, जिसको मां मुंडेश्वरी का श्रृंगार कहा जाता है. उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी चमत्कार की बात तो यह है कि यहां बकरे की बलि तो दी जाती है लेकिन बकरा पुनः जीवित बाहर आता है. यह परंपरा सदियों से अनोखी है, यहां के लोग इसे चमत्कार कहते हैं और रक्त विहीन बलि कहा जाता है. यही नहीं उमापुर के ग्रामीण बताते हैं कि दोनों भाइयों में इतना भक्ति है कि गांव में भी अपने पैसा से मां काली का भव्य मंदिर बनवाए हैं, जो देखने में एक अद्भुद नजारा लगता है. उनका कहना है कि सनातन धर्म ही सबसे सर्वोपरि है उसे और आगे बढ़ाना है. (कैमूर से विशाल कुमार की रिपोर्ट).

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