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सीवान : सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी के बाद पुलिस छावनी में तब्दील हुआ कोर्ट परिसर, चार घंटे की जांच के बाद अफवाह साबित हुआ धमकी भरा ई-मेल

सीवान || सिविल कोर्ट परिसर में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया जब जिला जज मोतीस कुमार एवं जिला अधिवक्ता संघ के महासचिव नवेंदु शेखर दीपक के आधिकारिक ई-मेल पर एक अनजान मेल प्राप्त हुआ. मेल में स्पष्ट रूप से यह धमकी दी गई थी कि बुधवार की दोपहर 12 बजे सिविल कोर्ट को बम से उड़ा दिया जाएगा. इस सूचना के मिलते हीं न्यायालय, प्रशासन और पुलिस महकमे में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.

धमकी की गंभीरता को देखते हुए तत्काल सिविल कोर्ट परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया. मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई और पूरे परिसर को चारों ओर से घेर लिया गया. सुरक्षा व्यवस्था को सख्त करते हुए माइकिंग के माध्यम से अधिवक्ताओं एवं कर्मचारियों को अपने-अपने सीट और आसपास के क्षेत्र की जांच करने का निर्देश दिया गया. वहीं पुलिस अधिकारियों द्वारा सिविल कोर्ट परिसर के कोने-कोने की गहन तलाशी ली गई. बम निरोधक दस्ता एवं अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट मोड पर आ गई. कोर्ट परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सख्ती से जांच की गई और बिना पहचान के किसी को भी अंदर जाने पर रोक लगा दिया गया. मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम विवेक रंजन मैत्रेय और एसपी पूरन कुमार झा भी कोर्ट कैंपस में पहुंच हर चीज का बारीकी से मुआयना किया.

हालांकि, करीब चार घंटे की गहन जांच पड़ताल के बाद धमकी भरा ईमेल कोरा अफवाह साबित हुआ. जिसके बाद पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच में सहयोग करने की अपील की. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, जबकि धमकी भरे मेल की जांच साइबर सेल द्वारा की जा रही है और मेल भेजने वाले की पहचान करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं. वहीं इस मामले को लेकर जिला न्याय विभाग भी काफी गंभीर है. जिला जज ने अब सिविल कोर्ट कैंपस में चहारदीवारी निर्माण कर गेट लगाने और गैर जरूरी लोगों व गाड़ियों के कोर्ट कैंपस में आवागमन पर रोक लगाने की बातें कहीं. गौरतलब है कि सीवान में सिविल कोर्ट तीन अलग अलग स्थानों पर अवस्थित है, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) कोर्ट और अधिवक्ता संघ जहां गांधी मैदान से सटे अवस्थित है वहीं जिला एवं सत्र न्यायाधीश का न्यायालय डीडीसी ऑफिस के पास तो अन्य जजों और मजिस्ट्रेट का न्यायालय दाहा नदी के पास है. तीन अलग-अलग स्थानों पर न्यायालय के होने के कारण कचहरी की परिधि काफी बड़ी है जिससे सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ न्यायिक कार्यों से जुड़े लोगों, अधिवक्ता और मुवक्किलों के समक्ष भी काफी परेशानियां होती हैं. (सीवान से लव प्रताप सिंह की रिपोर्ट).

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