देहरादून में आयोजित ओपन बुक्स ऑनलाइन साहित्योत्सव में बिहार के शायर समीर परिमल ‘ओबिओ साहित्य रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित

अभिषेक श्रीवास्तव

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इस अवसर पर राजेश कुमारी ‘राज’ के लघुकथा संग्रह ‘गुल्लक’ तथा ग़ज़ल संग्रह ‘डाली गुलाब पहने हुए’ का लोकार्पण किया गया. साथ ही एक भव्य कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया. जिसमें बिहार के साहित्यकारों गणेश जी बाग़ी, डॉ रामनाथ शोधार्थी, सागर आनंद व समीर परिमल ने अपनी रचनाओं से धूम मचा दी. समीर परिमल ने ‘हम फ़क़ीरों के क़ाबिल रही तू कहाँ, जा अमीरों की कोठी में मर ज़िन्दगी’ सुनाकर महफ़िल लूट ली. वहीं दर्शकों द्वारा बार-बार इस शेर को सुनने की फ़रमाईश की जाती रही. मंच से भी खूब दाद मिली. इसके बाद रामनाथ शोधार्थी ने पढ़ा ‘इश्क़ दरअसल कुछ नहीं होता, इश्क़ दरअसल है तो सबकुछ है.’ वहीं सागर आनंद ने कहा ‘बात वाजिब हो अगर, कहने की कोशिश कीजिये, रौशनी कम हो अगर, जलने की कोशिश कीजिये.’ जबकि गणेश जी बाग़ी ने अपनी घनाक्षरी सुनाकर खूब तालियाँ बटोरीं.
इस मौके पर देश के विभिन्न राज्यों से आये कवियों व शायरों ने भी अपनी रचनाएँ सुनाईं. कार्यक्रम की अध्यक्षता असीम शुक्ल व संचालन शादाब अली ने किया.
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