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चाईबासा : जगन्नाथपुर बीडीओ के विरुद्ध 16 मुखियाओं ने लगाया आर्थिक भयादोहन का आरोप, विधायक सोनाराम सिंकू को ज्ञापन देकर की कार्रवाई की मांग

चाईबासा में 14 वें वित्त आयोग के दिशा निर्देश को नजर अंदाज करते हुए फर्जी योजना की जानकारी दें जगन्नाथपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी संतोष कुमार द्वारा दबाव बनाकर हाईमास्ट लाईट खरीदवाने और फिर दबाब बनाकर बगैर भाउचर के ही मुखियाओं से चेक लिए जाने का मामला अब गरमाने लगा है. इस मामले को लेकर जगन्नाथपुर प्रखंड के 16 पंचायतों के मुखियाओं ने बीडीओ के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए स्थानीय विधायक सोनाराम सिंकू से शिकायत की है.

बता दें कि जगन्नाथपुर प्रखंड के 16 पंचायत के मुखियिओं नें बीडीओ संतोष कुमार पर आर्थिक व भयादोहन का आरोप लगाते हुए विधायक सोनाराम सिंकु से की लिखित शिकायत और मामले की जांच कर बीडीओ पर कार्रवाई करने की मांग की है. वहीं जगन्नाथपुर प्रखंड में पदास्थापित बीडीओ संतोष कुमार पर पंचायत राज व्यवस्था के तहत चयनित पंचायत मुखियाओं ने भयादोहन और आर्थिक दोहन का षडयंत्र करने का भी आरोप लगाया गया है.

इस सबंध में मुखियाओं ने विधायक सोनो राम सिंकु को पेशा कानून -996 व झारखण्ड पंचायती राज अधिनियम 2001 का अवहेलना कर संतोष कुमार प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा प्रखड के निर्वाचित मुखियाओं के साथ भयादोहन व आर्थिक दोहन के षड्यंत्र का उचित कार्रवाई करने के संबंध में मांग पत्र सौंपा. मुखियाओं द्वारा विधायक सोनाराम सिंकु को ध्यानाकृष्ट करते हुए कहा की पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) केन्द्र सरकार के राज्य के नीति निर्देशक तत्व के तहत पंचायती व्यवस्था को 1992 में 73वां संविधान संशोधन कर संविधान के मूल अनुच्छेद 243 में सहामित किया गया और उल्लेखित केन्द्रीय कानून को झारखण्ड पंचायती राज्य अधिनियम 2001 के रूप में राज्य सरकार आत्मार्पित कर लिया. तत्पश्चात 2010 से पंचायती राज व्यवस्था का चुनाव राज्य चुनाव आयोग द्वारा सुनिश्चित किया जा सकता है. पेश कानून मूलत अनुसूचित राज्य, जिला और प्रखण्ड में लागू है. झारखण्ड पांचवी अनुसूची रज्य और जिला और जगन्नाथपुर प्रखण्ड अनुसूचित जिला और क्षेत्र के रूप में अधिसूचित की गई है. जिला और प्रखण्ड में पेशा कानून के तहत चुनाव सुनिश्चित कराया गया.यही वजह है कि हमारे प्रखण्ड के सभी ग्राम पंचायत का मुखिया अनुसूचित जनजति के अंतर्गत श्रेणीबद्ध प्रमाण-पत्र के आलोक में निर्वाचित हुए है. पेशा कानून में ग्राम सभा के अधिकार को बल दिया गया है. चाहे योजनाओं का चयन , क्रियान्वयन या उपयोगिता प्रमाण – पत्र निर्गत करने में हो. पेशा कानून के तहत निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को जानकारी प्रदान करने के लिए समुचित प्रशिक्षण का प्रावधान है और यह कार्य प्रखंड में पदस्थापित पदाधिकारी और पंचायत सेवक को संयोजन और समन्वय से सुनिश्चित करने का मार्गदर्शन है. लेकिन बीडीओ संतोष कुमार और उनके दबाव में पंचायत सेवक उल्टा हम जनता द्वारा निर्वाचित मुखिया जनप्रतिनिधियों के साथ भयादोहन आर्थिक दोहन के लिए षड्यंत्र करते है. खासकर 14 वे वित्त आयोग के तहत सरकार द्वारा निर्देशित महत्वकाक्षी योजनाओं को क्रियान्वित करने में संतोष कुमार ने हद कर दी. जब उनके पसंद के आयुष ट्रेडर्स पूर्वी सिंहभूम के सवेदक बबलू से ही हाईमास्ट लाईट लगाने का धमकी देने लगे और तो और उसे लगाने के पूर्व ही उनको तीन-तीन लाख रूपया का चेक देने का धमकी देने लगे. संतोष कुमार, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी की ऐसे व्यवहार व आचारण से हम सभी मुखियागण बहुत आहत है. ऐसे लगता है कि अनुसूचित जनजति के होने के कारण श्री संतोष कुमार, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, जगन्नाथपुर हमलोग के साथ ऐसे प्रताड़नापूर्ण आचरण करते हुए निवेदन किया गया है की संविधान सम्मत कर्रवाई करते हुए पेशा कानून की विशेषता को बचाया जाए, ताकि उक्त कानून के तहत हम आदिवासी अपने स्तर से विकास कार्य को गति प्रदान करते हुए राष्ट्र के मुख्य धारा से जुड़ सकें और संतोष कुमार, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी जगन्नाथपुर के खिलाफ उचित आश्यक विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाय.

गौरतलब है कि मुखियाओं ने सोमवार को उपायुक्त को भी मांग पत्र देकर उक्त आरोप लगाते हुए बीडीओ के पर उचित कार्रवाई की मांग की. मांग पत्र में कहा गया है कि बीडीओ पंचायत सेवकों पर दबाव बना कर मुखियाओं से भयादोहन और आर्थिक दोहन का षड्यंत्र किया जा रहा है. 14 वीं महत्वाकांक्षी विकास योजनाओं को पंचायतों में क्रियान्वयन करवाने में बीडीओ ने अहम भूमिका निभाया है. (संतोष वर्मा की रिपोर्ट).

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