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सीवान : छत्रपति शिवाजी महाराज की मनी जयंती, लोगों ने उनकी जीवनी पर डाला प्रकाश

सीवान || जिले के पचरूखी प्रखंड के बड़कागांव उमाशंकर सिंह भवन में गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाई गई. जहां सभी आगंतुको ने उनकी तैल चित्र पर फूल चढ़ाया और अगरबत्ती जालाकर उन्हें नमन किया.

इस अवसर पर संस्थापक जीतेन्द्र सिंह पटेल ने कहा कि यह उत्सव नहीं, संकल्प का दिन है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि यदि इच्छाशक्ति प्रबल हो, तो इतिहास बदला जा सकता है. भारत के इतिहास में कुछ नाम केवल व्यक्तित्व नहीं होते, वे विचार बन जाते हैं, प्रेरणा बन जाते हैं और युगों तक मार्गदर्शक बने रहते हैं. ऐसे हीं एक तेजस्वी नाम हैं छत्रपति शिवाजी महाराज. आज उनकी जयंती मनाई जा रही है जो राष्ट्रगौरव का पर्व है. 19 फरवरी को जन्मे शिवाजी महाराज ने उस समय स्वराज का स्वप्न देखा, जब देश का अधिकांश भाग विदेशी सत्ता के अधीन था. उन्होंने साबित किया कि दृढ़ संकल्प, रणनीति और जनसमर्थन से असंभव भी संभव हो सकता है. उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी दुर्ग में हुआ था. उनकी माता राजमाता जीजाबाई ने उनमें बचपन से ही धर्म, नीति और शौर्य के संस्कार डाले. उनके पिता शाहजी भोसले एक वीर योद्धा था. बाल्यकाल से ही शिवाजी ने अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना सीखा. उन्होंने किशोर अवस्था में ही कई किलों पर अधिकार कर लिया और मराठा शक्ति की नींव रखी. वहीं पप्पु पटेल ने कहा की शिवाजी महाराज का सबसे बड़ा योगदान था “हिंदवी स्वराज” की स्थापना. यह केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा का आंदोलन था. जितेश पटेल के अनुसार, उनकी गुरिल्ला युद्ध नीति (गनिमी कावा) ने शक्तिशाली साम्राज्यों को भी हिला दिया. औरंगज़ेब जैसी विशाल मुगल शक्ति के सामने भी उन्होंने साहसपूर्वक संघर्ष किया. सचिन पटेल ने कहा कि
उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया, नौसेना की स्थापना की और किसानों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी.उनके शासन में स्त्रियों के सम्मान और धार्मिक सहिष्णुता का विशेष ध्यान रखा गया. रायगढ़ किले पर उनका भव्य राज्याभिषेक हुआ और वे औपचारिक रूप से “छत्रपति” बने. यह क्षण केवल एक राजा के ताज पहनने का नहीं, बल्कि स्वराज की आधिकारिक घोषणा का था. मराठा साम्राज्य ने आगे चलकर भारतीय राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाई और मुगल सत्ता को गहराई तक चुनौती दी.

मौके पर कमलेश सिंह पटेल, उमेश सिंह पटेल, अवधेश सिंह, बच्चा सिंह पटेल, बुलेट सिंह, हरेंद्र सिंह, प्रेम सिंह, अवनीत कुमार, डॉ राजीव रंजन सिंह सहित सैंकड़ो लोग मौजूद थे. (सीवान से उमेश सिंह पटेल की रिपोर्ट).

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