दुमका : हस्तकरघा रेशम एवं हस्तशिल्प निदेशालय द्वारा रेशम उत्पादकों का प्रमण्डल स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

दुमका में सोमवार को इंडोर स्टेडियम में उद्योग विभाग के तत्वावधान में हस्तकरघा रेशम एवं हस्तशिल्प निदेशालय द्वारा रेशम उत्पादकों का प्रमण्डल स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिसका उद्घाटन मुख्य अतिथि संथाल परगना आयुक्त भगवान दास ने अर्जुन एवं आसन के पौधे में पानी देकर तथा दीप प्रज्ज्वलित कर किया.
इस अवसर पर संथाल परगना आयुक्त भगवान दास ने कहा कि दुमका जिला तसर उत्पादन के क्षेत्र में निरंतरआगे बढ़ते जा रहा है. वन विभाग से अनुरोध किया कि अर्जून एवं मलवरी का पौधा का रोपन ग्रामीण क्षेत्रों में परती भूमि को चिन्हित कर किया जाय, जिससे अधिक से अधिक बीज उत्पन्न हो सके. तसर से जूड़े किसानों को उनकी मेहनत की सही किमत मिल सके इस दिशा में कार्य करने की जरुरत है. उन्होंने कहा कि जो भी किसान तसर से जुड़े हैं उसे और भी प्रशिक्षण देने की जरुरत है ताकि वह और भी मेहनत कर सके और इस क्षेत्र में कामयाबी हासिल कर सके.
वहिं उपायुक्त दुमका मुकेश कुमार ने कहा कि इस प्रकार के कार्यशाला का आयोजन प्रमण्डल स्तर पर किया जाता है यह बहुत ही सहरानीय है. इस कार्यशाला के माध्यम से लोगों की क्षमता का पता चलता है और इससे लोगों को और भी कई महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है. दुमका जिला में तसर उत्पादन की काफी क्षमता है. उन्होंने कहा कि पूरे देश में जो तसर की उत्पादन होता है उसमें सबसे ज्यादा उत्पादन झारखंड में होती है और झारखंड में जो तसर की उत्पादन होती है उसमें सबसे ज्यादा उत्पादन हमारे संथाल परगना के दुमका जिला के अंदर किया जाता है. 80 प्रतिशत यदि झारखंड में तसर की उत्पादन होता है तो इस 80% में 70% उत्पादन हमारे संताल परगना के दुमका जिला में होता है. उन्होंने कहा कि कोकून का दर निर्धारित किया गया है ताकि इसके बीच से बिचैलिया को बिल्कुल समाप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में संथाल परगना की पहचान लोगों में तसर नगरी के रुप में होगी. रेशम विभाग से अनुरोध करते हुए कहा कि तसर से जूड़ी जिन भी चीजों की जरुरत है उन सभी जरुरतों को पूरा किया जा सके ताकि तसर की उत्पादन में और भी बढ़ौतरी हो सके. उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा कोकून बैंकों का निर्माण कराया जाय. दुमका जिला के अंदर लगभग 27 हजार परिवार किसी ना किसी प्रकार से तसर उत्पादन के क्षेत्र से जूड़ा हुआ है. तसर का बहुत बड़ा खजाना संताल पगरना के अंदर छुपा हुआ है, जिसका सकरात्मक रुप लेना बाकी है. उन्होंने कहा कि रेशम निदेशालय को और भी बजट देने की जरुरत है तथा और भी ठोस निर्णय लिया जा सके.
वहीं रेशम निदेशक उदय प्रताप ने कहा कि आज रेशम क्रांति का शंखनाद करने आया हूँ. आज वास्तव में जो भी रेशम से जुड़े कार्य हो रहा हैं उसके कर्मधार आप सभी हैं. आज जो किसान तसर की उत्पादन करते है, उन सभी को प्रर्याप्त बाजार मिले इसकी जरुरत है. तभी जाकर तसर की क्षेत्र में बढ़ोतरी संभव है. सभी किसान को कुकुन के उत्पादन से लेकर साड़ी के निर्माण तक जो आय है वह बहुत ही अधिक होती, ये सभी आय किसान को मिले इस दिशा में सरकार कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि रेशम निदेशलय आप सभी के लिए दिन रात कार्य कर रही है, इसका परिणाम बहुत जल्द आप सभी को मिलेगा. रेशम विभाग में जितने भी रिक्तियाँ अबतक खाली है बहुत ही जल्द उन सभी रिक्त पद को भरा जायेगा. अपनी आय को कड़ी मेहनत और लगन से आपको बढ़ाना है. रेशम व्यवसाय से जूड़कर महिलायें सशक्त बन रहे. यह रेशम का व्यवसाय पलायनवाद को भी खत्म करने का कार्य किया है.
इस अवसर पर मुख्य अथितियों ने तसर उत्पादक से जूड़ी मार्गदर्शिका का विमोचन किया. साथ ही तसर में उत्कृष्ट कार्य हेतु किसानों को सम्मानित किया. मौके पर प्रशिक्षु आइएएस शशि प्रकाश, उप निदेशक जनसम्पर्क शालिनी वर्मा, सूचना विज्ञान पदाधिकारी रवि रंजन व संबंधित विभाग के अधिकारी एवं कर्मी तथा बड़ी संख्या में प्रमण्डल स्तर के किसान आदि उपस्थित थे.
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