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सीवान : पूर्व भाजपा विधायक डॉ कुमार देवरंजन सिंह ने एसटी-एससी एक्ट में संसोधन के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बताया जनहित में

अभिषेक श्रीवास्तव

सीवान में महाराजगंज के पूर्व भाजपा विधायक डॉ कुमार देवरंजन सिंह ने गत 20 मार्च को सर्वोच्च न्यायलय द्वारा अनुसूचित जाति अधिनियम में किये गए सुधार और संसोधन के फैसले का समर्थन करते हुए उसे व्यापक जनहित में, समय की मांग और कानून के दुरुपयोग को रोकने वाला बताया है. शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते डॉ देवरंजन ने एससी के फैसले का स्वागत किया.

पूर्व विधायक ने कहा कि इस फैसले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि अब इस कानून के तहत प्राााथमिकी होने पर सक्षम पदाधिकारी द्वारा जांच होगी और शिकायत में कुछ सच्चाई होने पर ही गिरफ़्तारी की जाएगी. अभी तक केवल एफआईआर होते ही गिरफ़्तारी हो जाती थी जो कि अन्यायपूर्ण था. उन्होंने कहा कि लम्बे समय से इस कानून का दुरुपयोग हो रहा था. प्रायः इस कानून का इस्तेमाल भयादोहन (blackmailing) के लिए होता था. सामान्य व्यक्ति के अलावा सरकारी कर्मचारी भी इस कानून से त्रस्त थे. गाँव और मोहल्ले के झगड़े में इस कानून का नाजायज इस्तेमाल होता था. इस कानून के भय से सरकारी कर्मचारी / पदाधिकारी अपने कर्तव्य का निष्पक्ष ढंग से पालन नहीं कर पाते थे. झूठे मुकदमे से लोगों फंसाया जाता था. उन्हें आर्थिक, शारीरिक और मानसिक परेशानी होती थी और इस प्रकार के झूठे मुकदमों से अदालतों का भी समय नुकसान होता था. उन्होंने कहा कि जब भी किसी कानून का उपयोग से ज्यादा दुरुपयोग होने लगता है तो सर्वोच्च न्यायालय उस कानून को जनहित में और न्यायहित में संशोधित करता है. ऐसा कई बार हुआ है. सर्वोच्च न्यायालय को ऐसा इसलिए करना पड़ता है कि वोट की राजनीति के चक्कर में राजनीतिक दल जनहित और न्यायहित को भूल जाते हैं.
हाल के दिनों में कुछ दलों के विधायक, सांसद और मंत्री इस फैसले का खुलेआम विरोध कर रहे हैं. सर्वोच्च न्यायलय की आलोचना कर रहे हैं और दबाब की राजनीति कर रहे हैं. वे केवल वोट की राजनीति के लिए एक सही फैसले का विरोध कर रहे हैं और जनता को दिग्भ्रमित कर रहे हैं. ऐसे प्रयास की मैं निंदा करता हूँ.

 

साथ ही उन्होंने अनुरोध किया कि सभी राजनीतिक दल तथा सबका हित चाहने वाले लोग इस फैसले का समर्थन और स्वागत करें और अनावश्यक विवाद खड़ा करके जनता को दिग्भ्रमित न करें. अगर आवश्यक हुआ तो इस फैसले का विरोध करने वाले लोगों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना का मुकदमा भी चलाया जा सकता है. इस फैसले का समर्थन और स्वागत करते हुए डॉ देवरंजन ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष सहित सभी प्रमुख पार्टियों के अध्यक्ष को पत्र लिखने की बाते कहीं.

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