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बेतिया : चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के अवसर पर सीएम नीतीश कुमार ने वादों की लगायी लड़ियां

अंजलि वर्मा

बेतिया में सोमवार को चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष 2017-18 के अवसर पर गौनाहा प्रखंड के गांधी आश्रम, भितिहरवा के समीप एक जन सभा का आयोजन हुआ. जिसमे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिरकत करते हुए सभा को संबोधित किया. वहीं मुख्यमंत्री ने 4.92 करोड़ लागत से बनने वाले बहुउदेश्यीय हॉल का शिलान्यास भी किया.

इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि बुनियादी विद्यालयों का जीर्णाद्धार किया जायेगा. सीएम ने कहा कि छ: बुनियादी विद्यालयों को पुर्नजीवित करने का संकल्प लिया गया है. जिसकी शुरूआत पश्चिम चम्पारण जिले के गौनाहा प्रखंड अंतर्गत बुनियादी विद्यालय से की जा रही है. उन्होंने कहा कि मधुबन, लखनपुर, बड़हरवा, लखनमेन, मुरली भरहवा बुनियादी विद्यालयों का हर हाल में जीर्णाद्धार कार्यक्रम तय समय सीमा में पूरा कर लिया जायेगा. उन्होंने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में चंपारण सत्याग्रह आंदोलन का महत्वपूर्ण भूमिका है और चम्पारण सत्याग्रह के 100 वें वर्ष को यादगार बनाने के लिए सरकार द्वारा व्यापक कार्यक्रम चलाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य के सभी विद्यालयों में प्रार्थना सभा के बाद बापू के संदेशों व विचारों से संबंधित कहानियों का कथा वाचन कार्यक्रम किया जा रहा है और गांधी जी के जीवन दर्शन पर आधारित फिल्मव वृत चित्र को गांधी रथ के माध्यम से गांव-गांव में दिखाया जा रहा है. माननीय मुख्यमंत्री ने चंपारण सत्याग्रह आंदोलन में पंडित राजकुमार शुक्ल की महत्वपूर्ण भूमिका की विस्तार से चर्चा किया और कहा कि गांधी जी को चंपारण लाने में पंडित राजकुमार शुक्ल जी का बड़ा योगदान है. गांधी जी चंपारण आये तो उन्होंने किसानों की माली हालत को निकट से जाना और अंग्रेज निलहों के खिलाफ जोर-शोर से आंदोलन चलाया गया. उस समय अंग्रेजों द्वारा गरीब किसानों पर तरह-तरह के टैक्स लगाये गये थे और उन पर अत्याचार किये जाते थे. गांधी जी ने इसे ही मुद्दा बनाकर अंग्रेज अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया और गांधी जी के अथक प्रयास से अंग्रजों को झुकना पड़ा. उन्होने कहा कि शुक्ला जी का गांव देखने गये गांधीजी पर मुकदमा दर्ज हुआ. वे बाहर नहीं गये. गांधीजी ने कहा कि हम यहां के लोगों के दुख-दर्द को जानने के लिए यहां आये हैं. कोर्ट के निर्णय के मुताबिक अंग्रजों को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्हें झुकना पड़ा. तिनकठिया प्रणाली गांधीजी के प्रयासों के कारण ही समाप्त हुआ. मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधीजी ने चंपारण के लोगों को देखा और समझा. यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, साफ-सफाई पर लोगों का ध्यान और जागृति नहीं है. गांधीजी ने शिक्षा के प्रचार-प्रसार का मन बनाया और स्वच्छता व स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास किये. सैकड़ों लोगों के सहयोग से स्कूल भवन का निर्माण किया गया जिसे भितिहरवा आश्रम के नाम से जाना जाता है. उन्होंने कहा कि यहां महात्मा गांधीजी से जुड़े स्थलों पर गांधीजी की मूर्ति प्रतिस्थापित की जायेगी. उन्होंने कहा कि भितिहरवा त्याग की भूमि है. गांधी सर्किट का विकास किया किया जा रहा है.

इस सभा को माननीय शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, पर्यटन मंत्री, प्रमोद कुमार, गन्ना उद्योग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री, खुर्षीद आलम उर्फ फिरोज अहमद, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री, मदन सहनी, एवं अन्य गणमान्य अधिकारियों ने संबोधित किया. डीएम बेतिया डॉ निलेश रामचन्द्र देवरे, डीडीसी, योगेन्द्र सिंह व अन्य पदाधिकारियों द्वारा माननीय मंत्रियों को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया.

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