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कैमूर : यूजीसी के समर्थन में सड़क पर उतरे SC/ST भीम आर्मी के लोग, 12 सूत्री मांग की लेकर डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन

कैमूर/भभुआ || शनिवार को यूजीसी बिल कानून के समर्थन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग अति पिछड़ा वर्ग एवं धार्मिक अल्पसंख्यक समाज एवं भीम आर्मी के लोग सड़क पर उतरे और भभुआ लिच्छवी भवन पर धरना दिया. वहीं यूजीसी बिल कानून से स्टे ऑर्डर हटाने सहित 12 सूत्री मांगों को लेकर डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया.

वहीं इस दौरान छात्र नेता मुकेश कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने जो यूजीसी बिल कानून लाया था, उसे कुछ असामाजिक तत्वों और भ्रष्ट नेताओं के कारण, सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी कानून पर स्टे लगा दिया है. इसलिए हम लोग मांग करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट अगले फैसले में यूजीसी बिल कानून को लागू करने के पक्ष में आदेश सुनाए, नहीं तो हम सब देश के पिछड़ा अतिपिछड़ा वर्ग के लोग मजबूर होकर सरकार का घेराव कर दबाव बनाएंगे. लेकिन यूजीसी बिल कानून को लागू करा कर रहेंगे. उन्होंने कहा कि यूजीसी बिल कानून को लागू नहीं होने देना,यह मनुवादियों की एक सोची समझी चाल, क्योंकि यूजीसी बिल कानून के तहत, बड़े-बड़े विद्यालयों में और यूनिवर्सिटी में सभी वर्ग के छात्रों को एक समान रहना है. लेकिन, मनुवादी नहीं चाहते कि पिछड़ा अतिपिछड़ा वर्ग के लोग आगे बढ़ें, क्योंकि मनुवादी हर जगह अपना पांव पहले से ही पसारे हुए हैं और जब एससी-एसटी वर्ग के लोगों के लिए कोई कानून बनता है तो उसको लोग बंद कर देते हैं. लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा हम लोगों ने 12 सूत्री मांग को लेकर डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है और मांग किया है कि यूजीसी कानून 2026 को तत्काल भाव से लागू किया जाए. यूजीसी बिल कानून 2026 पर उच्चतम न्यायालय द्वारा लगाया गया रोक को तत्काल हटाया जाए. यूजीसी कानून को सांसद के विशेष सत्र बुला कर कानून बनाकर तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए. विश्व विद्यालयों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति पिछड़ा वर्ग अति पिछड़ा वर्ग एवं धार्मिक अल्पसंख्यक वर्ग के आरक्षित शैक्षिक एवं शैक्षणिक रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए.

विश्व विद्यालयों में जाति धर्म एवं लिंग के आधार पर हो रहे भेदभाव को समाप्त किया जाए. भारतीय न्याय प्रणाली में भी आयोग का गठन किया जाए. न्यायपालिका में भी खाली आरक्षित वर्ग के लोगों को समुचित भागीदारी सुनिश्चित किया जाए. विश्वविद्यालय में शिक्षकों द्वारा जाति एवं धर्म एवं लिंग के आधार पर भेदभाव को समाप्त किया गया. देश में समान शिक्षा प्रणाली लागू किया जाए. शिक्षा में अवसर की समानता को लागू किया गया, निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू किया जाए. विश्वविद्यालय में जाति एवं धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाले पर आपराधिक मुकदमा चला कर सजा दिया जाए. (कैमूर से विशाल कुमार की रिपोर्ट).

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